नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 देश से विदा हो चुका है, लेकिन इस बार बारिश का असमान वितरण बड़ी चिंता छोड़ गया है। भारत में जून से सितंबर के दौरान करीब 759.4 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 868.6 मिमी से लगभग 12.6% कम रही। IMD के अनुसार, यह 2001 के बाद चौथा सबसे कम मानसूनी वर्षा वाला सीजन रहा।
इस मानसून की सबसे बड़ी समस्या केवल कम बारिश नहीं, बल्कि उसका असमान वितरण रहा। कुछ रिपोर्टों के अनुसार देश के करीब 51% हिस्से में सूखे जैसे हालात बने, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई। सितंबर के अंत तक IMD के आंकड़ों में 17 मौसम उपखंडों, जो देश के 42% क्षेत्र को कवर करते हैं, में बारिश सामान्य से कम रही।
कम बारिश का असर खेती, जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। दक्षिण भारत के प्रमुख जलाशयों में 24 सितंबर तक लाइव स्टोरेज क्षमता का करीब 50% पानी था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह लगभग 79% था।
मौसम विभाग ने अक्टूबर में भी देशभर में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में रबी फसलों की बुआई, सिंचाई और जल उपलब्धता पर आने वाले महीनों में दबाव बना रह सकता है।