अमेरिकी दबाव बढ़ने और रूसी तेल खरीद पर संभावित नए टैरिफ के बीच भारतीय रिफाइनर नवंबर की डिलीवरी के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद घटाने पर विचार कर रहे हैं। 21 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार, कुछ बड़े प्रोसेसर वैकल्पिक स्रोतों से तेल की उपलब्धता तलाश रहे हैं, हालांकि रूसी आपूर्ति को पूरी तरह बदलना आसान नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह रूस-ईरान से जुड़ा नया कानून साइन किया, जो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। भारत इस व्यवस्था के संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रहा है। सरकार ने कहा है कि वह ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

भारतीय रिफाइनरों की सितंबर और अक्टूबर की रूसी तेल जरूरतें पहले से सुरक्षित बताई गई हैं। असली अनिश्चितता नवंबर और उसके बाद की खरीद को लेकर है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, वैकल्पिक तेल महंगा पड़ सकता है और वैश्विक आपूर्ति पहले से दबाव में है।

भारत ने पिछले वर्षों में रियायती रूसी कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता बढ़ाई है। अब आगामी खरीद चक्र अमेरिकी नीति, वैश्विक कीमतों और उपलब्ध वैकल्पिक आपूर्ति पर निर्भर करेगा।